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Month: January 2016

My Hindi/Urdu translation of Charles Simic’s “The Wine”

My Hindi/Urdu translation of Charles Simic’s “The Wine”

जो भी तसल्ली है तुम्हारे पास मेरे लिए,
पुरानी सुर्ख़ शराब के प्याले,
फुसफुसा दो मेरे कान में
मेरी हर चुस्की के साथ,
और सिर्फ़ मेरे कान में
यह वक़्त जो हो गया है संजीदा
रेडियो की ख़बरों से,
डूबते सूरज की बुझती आग से,
और मेरे अहाते के दरख्तों से
जो काले कोट पहन रहे हैं.

(The Original)

Whatever solace you have for me,
Glass of old red wine,
Whisper it into my ear
With each little sip I take,
And only in my ear,
In this hour made solemn
By the news on the radio,
The dying fires of the sunset,
And the trees in my yard
Putting on their black coats.

My Hindi/Urdu translation of Ziye’s “Winter Song”

My Hindi/Urdu translation of Ziye’s “Winter Song”

जब तालाब पर तीन फुट मोटी बर्फ़ होगी
और सफ़ेद बर्फ़ फैली होगी हज़ारों मील,
मेरा दिल फिर भी चीड़ और सरू के जैसा होगा,
लेकिन तुम्हारा दिल–वो क्या होगा?

~ ज़ी (जाड़े का गीत)

(The Original)

When ice on the pond is three feet thick
And white snow stretches a thousand miles,
My heart will still be like the pine and cypress,
But your heart–what will it be?