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Month: December 2017

My Hindi/Urdu translation of Charles Simic’s “Birds Know”

My Hindi/Urdu translation of Charles Simic’s “Birds Know”

पंछी जानते हैं

एक तालाब है, एक आदमी ने कहा,
दूर पीछे इस जंगल में,
जिसके बारे में पंछी और हिरन जानते हैं
और वहां अपनी प्यास बुझाते हैं

इतने ठंडे और साफ़ पानी में,
जैसे एक नया नकोर शीशा हो
किसी को अभी तक देखने का मौका नहीं मिला,
सिवाय, शायद, उस छोटे लड़के के,

जो बहुत साल पहले गुम गया था,
और हो सकता है उसमें डूब गया था,
या फिर छोड़ गया हो कोई निशाँ
उसके पथरीले किनारे के पास खेलते हुए,

बेहतर होगा मैं जाऊं और पता लगाऊं,
आज ही की रात, मैंने कहा अपने आप से,
मेरे दिल-ओ -दिमाग़ हंगामाख़ेज़,
और सनकी चाँद इतना रोशन.

(The Original)

Birds Know

There’s a pond, a man said,
Far back in these woods,
Birds and deer know about
And slake their thirst there

In a water so cold and clear,
It’s like a brand-new mirror
No one had a chance to look at yet,
Save, perhaps, that little boy,

Who went missing years ago,
And may’ve drowned in it,
Or left some trace of himself
Playing along its rocky edges.

I better go and find out,
This very night, I said to myself,
With my mind running wild,
And the moon out there so bright.