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Month: January 2015

My Hindi/Urdu translation of ‘Famous’, by Naomi Shihab Nye

My Hindi/Urdu translation of ‘Famous’, by Naomi Shihab Nye

‘मशहूर’

मछली के लिये दरिया मशहूर है

ख़ामोशी के लिये ऊँची आवाज़ मशहूर है
जिसे मालूम है वो धरती की उतराधिकारी है
इससे पहले कि कोई उसे बताये

बाढ़ पर सोता हुआ बिल्ला मशहूर है परिंदों के लिये
जो उसे देखते हैं अपने घर से

आंसू मशहूर है, कुछ देर ही सही, गाल के लिये

खयाल जो तुम्हारे दिल के करीब है, मशहूर है
तुम्हारे दिल के लिये

जूता मशहूर है ज़मीन के लिये
उस वर्दी के जूते से ज़्यादा मशहूर
जो मशहूर है सिर्फ फर्शों के लिये

मुड़ी हुई तस्वीर मशहूर है उसके लिये जिसने उसे पकड़ा हुआ है
जिसकी तस्वीर है उसके लिये तो बिल्कुल मशहूर नहीं

मैं मशहूर होना चाहती हूँ उन आते जाते आदमियों के लिये
जो सड़कें पार करते हुए मुस्कुराते हैं
किराने की क़तार में लगे चिपचिपे बच्चे
जिन्हें देख कोई मुस्कुराए और मशहूर हो जाए

मैं मशहूर होना चाहती हूँ चरखी की तरह
या बटन के काज की तरह, इसलिये नहीं कि उसने कोई चमत्‍कार किया
लेकिन इसलिये कि वो जो कर सकता है उसे कभी भूला नहीं

(The Original)

The river is famous to the fish.
The loud voice is famous to silence,
which knew it would inherit the earth
before anybody said so.
The cat sleeping on the fence is famous to the birds
watching him from the birdhouse.
The tear is famous, briefly, to the cheek.
The idea you carry close to your bosom
is famous to your bosom.
The boot is famous to the earth,
more famous than the dress shoe,
which is famous only to floors.
The bent photograph is famous to the one who carries it
and not at all famous to the one who is pictured.
I want to be famous to shuffling men
who smile while crossing streets,
sticky children in grocery lines,
famous as the one who smiled back.
I want to be famous in the way a pulley is famous,
or a buttonhole, not because it did anything spectacular,
but because it never forgot what it could do.

 

My Hindi/Urdu translation of ‘Anguish’, by Adelaide Crapsey

My Hindi/Urdu translation of ‘Anguish’, by Adelaide Crapsey

अज़ीयत

रखो तुम
अपनी खुश्क़ आँखों से ऩज़र
सारी रात, पर जब नीली सुबह
चमकते चांद को मैला करे, फ़िर रोना!
फ़िर रोना!

(The Original)

Keep thou
Thy tearless watch
All night but when blue-dawn

Breathes on the silver moon, then weep!
Then weep!

My Hindi/Urdu translation of ‘Biscuit’, by Jane Kenyon

My Hindi/Urdu translation of ‘Biscuit’, by Jane Kenyon

बिस्कुट

कुत्ते ने साफ़ कर दिया है अपना कटोरा
और उसका ईनाम है एक बिस्कुट
जो मैं उसके मुंह में डालती हूँ
जैसे एक पादरी डबल रोटी का प्रसाद देता है।

मुझसे बर्दाश्त नहीं होता वो भरोसा करने वाला चेहरा!
वो मांगता है डबल रोटी, उम्मीद
रखता है डबल रोटी की, और मैं अपने राज में
उसे पत्थर दे सकती थी।

(The Original)

The dog has cleaned his bowl
and his reward is a biscuit,
which I put in his mouth

like a priest offering the host.

I can’t bear that trusting face!
He asks for bread, expects
bread, and I in my power
might have given him a stone.